सरकारी स्कूल में पढ़ते निजी शिक्षक, चंदा कर वेतन देते हैं ग्रामीण

Dhanbad : तोपचांची के राजकीय मध्य विद्यालय नेरो में 130 छात्र-छात्राओं पढ़ाई करते है. इन बच्चों को पढ़ने के लिए आठ शिक्षक शिक्षिकाएं है. इनमें दो ही सरकारी शिक्षक हैं. जिन्हें सरकार वेतन देती है. बाकी 6 शिक्षकों को यहां के ग्रामीण हर महीने वेतन देते हैं. दरअसल जब बार-बार और हर मंच प्रशिक्षक की मांग करने के बाद भी निराश निराशा हाथ लगी. तब ग्रामीणों ने खुद ही शिक्षक की नियुक्ति कर दी. मुकेश रंजन महतो के नेतृत्व में यहां के युवाओं ने जन जागृति मंच बनाया. शिक्षकों की नियुक्ति की योजना बनाई. गांव में जो भी B.Ed या उच्च शिक्षा कर चुके थे. उनके आवेदन लिए और फिर साक्षात्कार के माध्यम से 6 अभ्यर्थियों का चयन कर लिया. अब हर महीने 8 टोलों के इस नेहरू गांव में घर-घर चंदा होता है. रुपए कलेक्ट करने के बाद जो राशि कम पड़ती है. उसकी भरपाई ग्रामीणों द्वारा ही बने केंद्रीय कमेटी के द्वारा की जाती है.


घोर नक्सल प्रभावित था नेरो अब बदले हालात


नेरो  कभी घर नक्सली प्रभावित गांव था. वर्ष 1995 में जब नक्सलियों ने गांव यहां यात्री बस अगवा कर गांव तक ले गई तो पटना तक हड़कंप मच गया था. उसे समय डेविड नमक नक्सली का खौफ था. 1997 में यहां पुलिस पिकेट को नक्सलियों ने उड़ाया दिया था. पुलिस के मुख्य विधि के शक पर दुर्गा महतो की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी. हालांकि अब हालात बदल चुके हैं.


गांव की ही बहू बेटियों ने संभाली पढ़ाई की कमान


स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक कनक कांति मेहता है. 2018 में स्कूल में 78 बच्चे ही रह गए थे. तब उन्होंने सेवा देने की इच्छुक गांव की पढ़ी-लिखी बहू या बेटी की तलाश शुरू कर दी. एक-एक कर पांच बेटियों का जुटान किया. वे 9 से 1:00 बजे तक क्लास लेने लगी. हालांकि एक-एक कर उनकी शादी हो गई और अब दो ही रह गई है.

चंदा कर 6 शिक्षकों को देते हैं हर माह 18000 वेतन

ग्रामीणों द्वारा नियुक्त 6 टीचर्स को प्रतिमा तीन ₹3000 वेतन दिए जाते हैं. नेरो गांव में 18 टोला में तीन तीन लोग महीने के आखिरी सप्ताह में चंदा इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं. यह राशि केंद्रीय कमेटी के पास जमा कर दी जाती है. सेवा में इकट्ठी राशि में जितनी भी काम पढ़ते हैं. उसका भुगतान केंद्रीय कमेटी के सदस्य खुद करते हैं.

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